यादों का समंदर उभरता हे किसी से दुर जाने के बाद।
ये मेहसूस मेने किया हे,परदेस आने के बाद।
कोई अपना कितना अपनाता हे।
ये पता चलता हे,परदेस आने के बाद।
माँ का प्यार,पापा की दाट,भैया की सलाह,दीदी का दुलार।
बहोत याद आता हे,परदेस आने के बाद।
सब कुछ पाकर भी,सब कुछ पाकर भी।
बहोत कुछ खोने का एहसास होता हे,परदेस आने के बाद।
कुछ ख्वाब पुरे,कुछ रह जाते आँखों में ही अधुरे।
ये देखा हे मेने परदेस आने के बाद ।
गैरों में कोई अपना मिल जाये तो,
हाल-ए-दिल यूं ही निकल जाता हे,परदेस आने के बाद।
हा इन अश्को का कोई रंग नहीं होता,आज मैंने भी जाना हे,परदेस आने के बाद।
कोई अपना बहोत याद आता हे परदेस आने के बाद।
कोई अपना बहोत याद आता हे परदेस आने के बाफ।
लिखितन
विपुल बोरिसा
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