दोनों तरफ एक जैसा ही मंज़र हे ।
छुपा रहे हे दोनों,जो दिल के अंदर हे l
वेसे तो फूल यहाँ खिलते हे,हरतरफ
ऐसे भी बाग़ हे यहाँ,जो बंजर हे ।
हम तो तैयार कब से हे खडे,दिलभर
हमें पता हे,तेरी आँखे ही खंजर हे ।
इतना ही गुमाँ हे,तो आ आज़माले
दिल तो, हम भी रखते समंदर हे ।
तु थक जायेगी बेवफाई करते-करते
वफ़ा के तो हम आज भी सिकंदर हे ।
विपुल बोरीसा
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