Wednesday, 29 August 2018

आस

आज तो हम भी इक आश लिये बैठे हे ।
अपनी मौत का सामान खास लिये बैठे हे ।

बड़े दिनों, बड़े मुद्दतो के बाद मिली हे हमे,
उसकी एक तसवीर जो पास लिये बैठे हे ।

नब्ज़ चलती हे, मगर पहेले की तरह नही,
रूह मर चुकी और जिंदा लाश लिये बैठे हे ।

जानते हे, अब कुछ हो तो सकता नही,
फिर भी न जाने क्यु वो काश लिये बैठे हे ।

मौत भी जालिम हो गई हे, बेवफ़ा उसकी तरह
न जाने किसकी दुआ, कितनी साँस लिये बैठे हे ।

विपुल बोरीसा

Saturday, 7 April 2018

અરીસો

એ ખૂબ કુશળ ચિત્રકાર હોવા છતાં આખી જીંદગી પ્રયત્નો કરવા છતાં એક ચિત્ર ના જ દોરી શક્યો.

એ ચિત્રકાર "અરીસો"હતો ને એ ચિત્ર જે એ કંડારી ના શક્યો એ "મન" નું હતું.

વિપુલ બોરીસા