Saturday, 19 October 2013

DARD-E-DIL



This is my first shayari for you.

                 दर्द-ए -दिल - 1

"ये शा य री  मे री अपनी बनी बनाई हें। 
ये हे वो आवाज़ जो मरे दिल से  निकल के आई हे। 
इक तु ही लगी अपनी बाकी सभी लगी पराई हे। 
इक तुज को ही पाने की आश मन में जगाई हे। 
तू  ही मेरे दिल की दवा मेरे दर्द की गहेरई हे। 
इक प्यारी सी तसवीर तेरी मेने दिल के कोने में सजाई हे। 

तूने तो हमे ठुकरा दिया , तूने तो हमे ठुकरा दिया। 
पर तू  खुश रहे सदा यही दुआ मेरे दिल से निकल के आई हे"। 

                   दर्द-ए -दिल - 2


 "हम तो इतने गम  में डूबे के पैमाने भी छलक गये। 
पर , हमे ये ना पता चला हम तेरे दिल से केसे निकल गये "।
 
 

 FROM
GHAYAL - VPUL







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